Tuesday, November 20, 2018

विदेशी मुद्रा प्रबंद अधिनियम 1999 Foreign currency management act, 1999

विदेशी मुद्रा प्रबंद अधिनियम  1999  (1999 का 42 ) KAYA HAI ?
 Foregion currency managment act 1999

  • संसद इस अधिनियम जून, 2000 को केंद्र सरकार के 1 दिन अस्तित्व में आया विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 की जगह के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 अधिनियमित किया है। उक्त अधिनियम के तहत मामलों की जांच के ऊपर लेने के उद्देश्य के लिए, निदेशक और अन्य अधिकारियों के साथ प्रवर्तन निदेशालय की स्थापना की है।                                                                                                                                                                                                                                                                      
  • अधिनियम की वस्तु को मजबूत करने और विदेशी व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य के साथ और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित विकास और रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए विदेशी मुद्रा से संबंधित कानून में संशोधन करने के लिए है।                                                                                                                                                                                                                                     
  • यह अधिनियम पूरे भारत में फैली हुई है और यह भी लागू होते हैं भारत में निवासी व्यक्ति के स्वामित्व या नियंत्रण भारत से बाहर सभी शाखाओं, कार्यालयों और एजेंसियों के लिए लागू होता है। यह इस अधिनियम के लागू होता है जिसे करने के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर प्रतिबद्ध किसी उल्लंघन के लिए भी लागू होता है।                                                                                  
  • धारा 3 - किसी अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से छोड़कर विदेशी मुद्रा में लेन-देन पर प्रतिबंध लगाता है। इस खंड में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक की सामान्य या विशेष अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति कर सकते हैं -

  • में डील या किसी भी व्यक्ति को किसी भी विदेशी मुद्रा या विदेशी प्रतिभूतियों नहीं हस्तांतरण; एक अधिकृत व्यक्ति जा रहा है।
  • के लिए या किसी भी तरीके से भारत के बाहर किसी भी व्यक्ति के निवासी के ऋण के लिए किसी भी भुगतान करें।
  • किसी अधिकृत व्यक्ति के आदेश द्वारा या किसी भी तरीके से भारत के बाहर किसी भी व्यक्ति के निवासी की ओर से किसी भी भुगतान के माध्यम से अन्यथा प्राप्त करें।

  • के लिए या अधिग्रहण या निर्माण या किसी भी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किसी भी संपत्ति के अधिग्रहण के लिए एक अधिकार के हस्तांतरण के साथ संघ में विचार के रूप में भारत में किसी भी वित्तीय लेन-देन में दर्ज करें।
धारा 4 - विशेष अधिनियम में प्रदान अलावा भारत के बाहर स्थित किसी भी विदेशी मुद्रा, विदेशी सुरक्षा या किसी भी अचल संपत्ति, अधिग्रहण पकड़े, मालिक, जिनके पास या स्थानांतरित करने से भारत में किसी भी व्यक्ति के निवासी नियंत्रित करनाशब्द "विदेशी मुद्रा" और "विदेशी सुरक्षा" वर्गों 2 क्रमशः अधिनियम के (एन) और 2 (ओ) में परिभाषित कर रहे हैं। केंद्र सरकार। विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियम, 2000। बना दिया है
खंड 6 - पूंजी खाता लेन-देन से संबंधित है। इस अनुभाग में एक व्यक्ति को आकर्षित या से या पूंजी खाता लेन-देन के लिए एक अधिकृत व्यक्ति के लिए विदेशी मुद्रा बेचने के लिए अनुमति देता है। केंद्र सरकार के परामर्श से भारतीय रिजर्व बैंक। उप-धारा (2) और (3) धारा 6 की। के संदर्भ में पूंजी खाता लेन-देन पर विभिन्न नियमों जारी किया है
धारा 7 -माल और सेवाओं के निर्यात के साथ संबंधित है। । हर निर्यातक भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य प्राधिकारी, एक घोषणा, आदि, प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक है; पूर्ण निर्यात मूल्य के बारे में।
खंड 8 - कारण या पाने के लिए उनके पक्ष में अर्जित की गई विदेशी मुद्रा के किसी भी राशि है, जो भारत में निवासी व्यक्तियों पर जिम्मेदारी डाले ही एहसास हुआ और विशिष्ट अवधि के भीतर भारत में प्रत्यावर्तित और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट तरीके ..
धारा 10 और 12 - अधिकृत व्यक्तियों के कर्तव्यों और देनदारियों के साथ संबंधित है। किनारे बैंकिंग इकाई या समय के लिए किसी अन्य व्यक्ति से दूर एक अधिकृत डीलर जिसका मतलब है कि अधिनियम की सेकंड.2 (ग) में परिभाषित किया गया है प्राधिकृत व्यक्ति, मुद्रा परिवर्तक, विदेशी मुद्रा या विदेशी प्रतिभूतियों में सौदा करने के लिए अधिकृत किया जा रहा।
चैनल्स 13 और 15 - दंड और निर्णायक प्राधिकरण के आदेशों का प्रवर्तन के साथ अधिनियम समझौते के साथ-साथ बिजली अधिनियम के तहत उल्लंघनों यौगिक के रूप में।
खंड 36-37 - इस अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए अधिनियम, नियम, विनियम, सूचनाएं, निर्देश या आदेश के किसी प्रावधान का उल्लंघन की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय और शक्तियों की स्थापना से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय और न सहायक के पद से नीचे प्रवर्तन के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। निदेशक जांच को लेने के लिए अधिकृत किया गया है।

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Saturday, November 17, 2018

Pratiyogita darpan succes mirror samanya gayan darpan all comptition book find one plateform jio mags

Hello dosto ,
Kaya aap comptition ki tayyari kar rahe hai to ye lekh aap ke liye hi hai agar app Sahar see door village me rahte hai to aap apne mobile me jio mags naam ki application ko install kar ke bahut si magines ka maja let sekte hai aap ko googal play store see jio magas naam ki application ko install karna hai aur uske serch baar me ja kar apne manpasand maggines jaise pratiyogita darpan jagran Josh succes mirror ko aasani see download kar ke padh sakte hai aur ye bilkul free hai  is jaankari ko apne dosto Tak share jarror Kare jisse wo bhi iska laabh pa sake .
Thanks

Friday, November 16, 2018

हनुमान चालीसा इन हिन्दी

श्री गुरु चरन  सरोज राज,निज मनु मुकुरु सुधारी। बरनउँ रघुबर विमल जासु ,जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके ,सुमिरौ पवन कुमार।   बल बुद्धि विद्या देहु मोहि  हरहु कलेश बिकार।।

जय ज्ञान गुन सागर।                               जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

 रामदूत अतुलित बल धामा।                                अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।                                     कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।                                 कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।                                 कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।                                 तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।                              राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।                           राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।                        बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।                           रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।                            श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।                            तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
  
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।                          अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।                              नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।                            कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।                           राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।                            लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।                           लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।                          जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।                             सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।                               होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।                         तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।                             तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।                      महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।                             जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।                            मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।                          तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।                       सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।                          है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।                       असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।                      अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।                              सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।                           जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।                         जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।                           हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।                         जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।                             कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।                         छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।                       होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।                           कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
दोहा :
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।





जयोतिष  शास्त्रों के अनुसार हनुमान चालीसा पढ़ने वाले भक्त को मंगल ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है  

स्नान के पश्चात हनुमान चालीसा का पाठ करें 

Thursday, November 15, 2018

स्वामी विवेकानंद आत्मानुभूति एवं उसके मार्ग हिंदी पीडीऍफ़ डाउनलोड

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दोस्त मै  आप लोगो के साथ स्वामी जी   की एक पुस्तक शेयर कर रहा हु जिसका नाम  आत्मा नुभूति एवं उसके मार्ग इस पुस्तक  स्वामी जी ने आत्मानुभव के बारे में  लिखा है आत्मा की शक्तिया एवं  उसको कैसे  पाया  जाए  इस पुस्तक को  दिए गए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते है | इस पुस्तक में साक्षी भाव से कैसे रहे अपने दिमाग को किस तरह साधे किस तरह मन को साधने से पहले अपने कर्म इन्द्रियों को साधे ,मन को भीतर बाहर भटकने से कैसे रोकें  इन्द्रियों को अपने काबू में रखने के तरीके अर्थात शम को कैसे सिद्ध करे।
तितीक्षा अर्थात सहनशीलता जो सबसे कठिन है कैसे सिद्ध करे.
अगर मुझे कोई गलत बात कह इ तो गुस्सा होने से कैसे रोकें अपने मन ऐसे कई प्रकार की रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी इस पुस्तक में आप को मिलेगी।
इनकी प्रसिद्ध पुस्तक - मै कौन हूँ  


“संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है असंभव से भी आगे निकल जाना।“

पूरा नाम – नरेंद्रनाथ विश्वनाथ दत्त     
घरेलू नाम – नरेन्द्र और नरेन
मठवासी बनने के बाद नाम – स्वामी विवेकानंद
जन्म – 12 जनवरी 1863
जन्मस्थान – कलकत्ता (पं. बंगाल)
पिता – विश्वनाथ दत्त
माता – भुवनेश्वरी देवी
भाई-बहन – 9
गुरु का नाम – रामकृष्ण परमहंस
शिक्षा – 1884 मे बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण
विवाह – विवाह नहीं किया
संस्थापक – रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन
फिलोसिफी – आधुनिक वेदांत, राज योग
साहत्यिक कार्य – राज योग, कर्म योग, भक्ति योग, मेरे गुरु, अल्मोड़ा से कोलंबो तक दिए गए व्याख्यान
अन्य महत्वपूर्ण काम– न्यूयार्क में वेदांत सिटी की स्थापना, कैलिफोर्निया में शांति आश्रम और भारत में अल्मोड़ा के पास ”अद्धैत आश्रम” की स्थापना।
कथन –           “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये”
मृत्यु तिथि – 4 जुलाई, 1902
मृत्यु स्थान – बेलूर, पश्चिम बंगाल, भारत


स्वामी विवेकानंद जी की शिक्षा – Swami Vivekananda Education

  • जब नरेन्द्र नाथ 1871 में उनका ईश्वर चंद विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संसथान में एडमिशन कराया गया।
  • 1877 में जब बालक नरेन्द्र तीसरी कक्षा में थे जब उनकी पढ़ाई बाधित हो गई थी दरअसल उनके परिवार को किसी कारणवश अचानक रायपुर जाना पड़ा था।
  • 1879 में, उनके परिवार के कलकत्ता वापिस आ जाने के बाद प्रेसीडेंसी कॉलेज की एंट्रेंस परीक्षा में फर्स्ट डिवीज़न लाने वाले वे पहले विद्यार्थी बने।
  • वे विभिन्न विषयो जैसे दर्शन शास्त्र, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञानं, कला और साहित्य के उत्सुक पाठक थे। हिंदु धर्मग्रंथो में भी उनकी बहोत रूचि थी जैसे वेद, उपनिषद, भगवत गीता, रामायण, महाभारत और पुराण। नरेंद्र भारतीय पारंपरिक संगीत में निपुण थे, और हमेशा शारीरिक योग, खेल और सभी गतिविधियों में सहभागी होते थे।
  • 1881 में उन्होनें ललित कला की परीक्षा उत्तीर्ण की थी वहीं 1884 में उन्होनें कला विषय से ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी कर ली थी।
  • इसके बाद उन्होनें 1884 में अपनी बीए की परीक्षा अच्छी योग्यता से उत्तीर्ण थी और फिर उन्होनें वकालत की पढ़ाई भी की।
  • 1884 का समय जो कि स्वामी विवेकानंद के लिए बेहद दुखद था क्योंकि इस समय उन्होनें अपने पिता को खो दिया था। पिता की मृत्यु के बाद उनके ऊपर अपने 9 भाईयो-बहनों की जिम्मेदारी आ गई लेकिन वे घबराए नहीं और हमेशा अपने दृढ़संकल्प में अडिग रहने वाले विवेकानंद जी ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
  • 1889 में नरेन्द्र का परिवार वापस कोलकाता लौटा। बचपन से ही विवेकानंद प्रखर बुद्धि के थे जिसकी वजह से उन्हें एक बार फिर स्कूल में एडमिशन मिला। दूरदर्शी समझ और तेजस्वी होने की वजह से उन्होनें 3 साल का कोर्स एक साल में ही पूरा कर लिया।
  • स्वामी विवेकानंद की दर्शन, धर्म, इतिहास और समाजिक विज्ञान जैसे विषयों में काफी रूचि थी। वेद उपनिषद, रामायण, गीता और हिन्दू शास्त्र वे काफी उत्साह के साथ पढ़ते थे यही वजह है कि वे ग्रन्थों और शास्त्रों के पूर्ण ज्ञाता थे।
  • नरेंद्र ने David Hume, Immanuel Kant, Johann Gottlieb Fichte, Baruch Spinoza, Georg W.F. Hegel, Arthur Schopenhauer, Auguste Comte, John Stuart Mill और Charles Darwin के कामो का भी अभ्यास कर रखा था।
  • स्वामी विवेकानंद पढ़ाई में तो अव्वल रहते थे ही इसके अलावा वे शारीरिक व्यायाम, खेलों में भी हिस्सा लेते थे।
  • स्वामी विवेकानंद जी ने यूरोपीय इतिहास का अध्ययन जेनेरल असेम्ब्ली इंस्टीटूशन में किया था।
  • स्वामी विवेकानंद को बंगाली भाषा की भी अच्छी समझ थी उन्होनें स्पेंसर की किताब एजुकेशन का बंगाली में अनुवाद किया आपको बता दें कि वे  हर्बट स्पेंसर की किताब से काफी प्रभावित थे। जब वे पश्चिमी दर्शन शास्त्रियों का अभ्यास कर रहे थे तब उन्होंने संस्कृत ग्रंथो और बंगाली साहित्यों को भी पढ़ा।
  • स्वामी विवेकानंद के प्रतिभा के चर्चे उनके बचपन से ही थे। इनका लगाव बचपन से ही आध्यात्म की तरफ अधिक लगाव था।  उन्हें बचपन से ही अपने गुरुओं की प्रशंसा मिली है
  • उन्होंने कई गुरओं आधयात्मिक ज्ञान लिया लेकिन राम कृष्ण इनके मुख्य गुरु थे  इसलिए उन्हें श्रुतिधर भी कहा गया है।

स्वामी विवेकानंद जी की मृत्यु – Swami Vivekananda Death

4 जुलाई 1902 को महज 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई। वहीं उनके शिष्यों की माने तो उन्होनें महा-समाधि ली थी।कुछ लोग कहते है की उन्हें गंभीर  बीमारी थी तो कुछ कहते है उन जहर दे दिया गया था अब सत्य कया है वो तो ईश्वर ही जानते है  उन्होंने अपनी भविष्यवाणी को सही साबित किया की वे 40 साल से ज्यादा नहीं जियेंगे। वहीं इस महान पुरुषार्थ वाले महापुरूष का अंतिम संस्कार गंगा नदी के तट पर किया गया था।

स्वामी विवेकानंद के विचार – Swami Vivekananda Quotes

अत्यंत प्रभावशाली और बुद्दिजीवी स्वामी विवेकानंद के विचारों से हर कोई प्रभावित होता था क्योंकि स्वामी जी के विचारों में हमेशा से ही राष्ट्रीयता देश हित  शामिल रही है। उन्होनें हमेशा देशवासियों के विकास के लिए काम किया है और नवजवानो के लिए वे प्रेरणा स्रोत  है वहीं उनके कई अनमोल विचारों को मानकर कोई भी मनुष्य अपना जीवन संवार सकता है।
स्वामी विवेकानंद जी मानते थे कि हर शख्स को अपनी जिंदगी में एक विचार या फिर संकल्प निश्चत करना  चाहिए और अपनी पूरी जिंदगी उसी संकल्प के लिए न्यौछावर कर देना चाहिए , तभी आपको सफलता मिल सकेगी।
एक कहावत है-
 एक लक्ष्य एक तरफ सारी दुनिया एक तरफ,  जब तक न मिले लक्ष्य एक तरफ सारी दुनिया एक तरफ 
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे                                      ये विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से समर्पित 
https://drive.google.com/file/d/12QL_S3R0UZ28hsSwqscIYMbz_-D7grk_/view?usp=sharing

 आप कोई सुझाव या जानकारी हमें मेल कर सकते है
                                   
                                  धन्यवाद