Thursday, November 15, 2018

स्वामी विवेकानंद आत्मानुभूति एवं उसके मार्ग हिंदी पीडीऍफ़ डाउनलोड

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दोस्त मै  आप लोगो के साथ स्वामी जी   की एक पुस्तक शेयर कर रहा हु जिसका नाम  आत्मा नुभूति एवं उसके मार्ग इस पुस्तक  स्वामी जी ने आत्मानुभव के बारे में  लिखा है आत्मा की शक्तिया एवं  उसको कैसे  पाया  जाए  इस पुस्तक को  दिए गए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते है | इस पुस्तक में साक्षी भाव से कैसे रहे अपने दिमाग को किस तरह साधे किस तरह मन को साधने से पहले अपने कर्म इन्द्रियों को साधे ,मन को भीतर बाहर भटकने से कैसे रोकें  इन्द्रियों को अपने काबू में रखने के तरीके अर्थात शम को कैसे सिद्ध करे।
तितीक्षा अर्थात सहनशीलता जो सबसे कठिन है कैसे सिद्ध करे.
अगर मुझे कोई गलत बात कह इ तो गुस्सा होने से कैसे रोकें अपने मन ऐसे कई प्रकार की रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी इस पुस्तक में आप को मिलेगी।
इनकी प्रसिद्ध पुस्तक - मै कौन हूँ  


“संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है असंभव से भी आगे निकल जाना।“

पूरा नाम – नरेंद्रनाथ विश्वनाथ दत्त     
घरेलू नाम – नरेन्द्र और नरेन
मठवासी बनने के बाद नाम – स्वामी विवेकानंद
जन्म – 12 जनवरी 1863
जन्मस्थान – कलकत्ता (पं. बंगाल)
पिता – विश्वनाथ दत्त
माता – भुवनेश्वरी देवी
भाई-बहन – 9
गुरु का नाम – रामकृष्ण परमहंस
शिक्षा – 1884 मे बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण
विवाह – विवाह नहीं किया
संस्थापक – रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन
फिलोसिफी – आधुनिक वेदांत, राज योग
साहत्यिक कार्य – राज योग, कर्म योग, भक्ति योग, मेरे गुरु, अल्मोड़ा से कोलंबो तक दिए गए व्याख्यान
अन्य महत्वपूर्ण काम– न्यूयार्क में वेदांत सिटी की स्थापना, कैलिफोर्निया में शांति आश्रम और भारत में अल्मोड़ा के पास ”अद्धैत आश्रम” की स्थापना।
कथन –           “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये”
मृत्यु तिथि – 4 जुलाई, 1902
मृत्यु स्थान – बेलूर, पश्चिम बंगाल, भारत


स्वामी विवेकानंद जी की शिक्षा – Swami Vivekananda Education

  • जब नरेन्द्र नाथ 1871 में उनका ईश्वर चंद विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संसथान में एडमिशन कराया गया।
  • 1877 में जब बालक नरेन्द्र तीसरी कक्षा में थे जब उनकी पढ़ाई बाधित हो गई थी दरअसल उनके परिवार को किसी कारणवश अचानक रायपुर जाना पड़ा था।
  • 1879 में, उनके परिवार के कलकत्ता वापिस आ जाने के बाद प्रेसीडेंसी कॉलेज की एंट्रेंस परीक्षा में फर्स्ट डिवीज़न लाने वाले वे पहले विद्यार्थी बने।
  • वे विभिन्न विषयो जैसे दर्शन शास्त्र, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञानं, कला और साहित्य के उत्सुक पाठक थे। हिंदु धर्मग्रंथो में भी उनकी बहोत रूचि थी जैसे वेद, उपनिषद, भगवत गीता, रामायण, महाभारत और पुराण। नरेंद्र भारतीय पारंपरिक संगीत में निपुण थे, और हमेशा शारीरिक योग, खेल और सभी गतिविधियों में सहभागी होते थे।
  • 1881 में उन्होनें ललित कला की परीक्षा उत्तीर्ण की थी वहीं 1884 में उन्होनें कला विषय से ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी कर ली थी।
  • इसके बाद उन्होनें 1884 में अपनी बीए की परीक्षा अच्छी योग्यता से उत्तीर्ण थी और फिर उन्होनें वकालत की पढ़ाई भी की।
  • 1884 का समय जो कि स्वामी विवेकानंद के लिए बेहद दुखद था क्योंकि इस समय उन्होनें अपने पिता को खो दिया था। पिता की मृत्यु के बाद उनके ऊपर अपने 9 भाईयो-बहनों की जिम्मेदारी आ गई लेकिन वे घबराए नहीं और हमेशा अपने दृढ़संकल्प में अडिग रहने वाले विवेकानंद जी ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
  • 1889 में नरेन्द्र का परिवार वापस कोलकाता लौटा। बचपन से ही विवेकानंद प्रखर बुद्धि के थे जिसकी वजह से उन्हें एक बार फिर स्कूल में एडमिशन मिला। दूरदर्शी समझ और तेजस्वी होने की वजह से उन्होनें 3 साल का कोर्स एक साल में ही पूरा कर लिया।
  • स्वामी विवेकानंद की दर्शन, धर्म, इतिहास और समाजिक विज्ञान जैसे विषयों में काफी रूचि थी। वेद उपनिषद, रामायण, गीता और हिन्दू शास्त्र वे काफी उत्साह के साथ पढ़ते थे यही वजह है कि वे ग्रन्थों और शास्त्रों के पूर्ण ज्ञाता थे।
  • नरेंद्र ने David Hume, Immanuel Kant, Johann Gottlieb Fichte, Baruch Spinoza, Georg W.F. Hegel, Arthur Schopenhauer, Auguste Comte, John Stuart Mill और Charles Darwin के कामो का भी अभ्यास कर रखा था।
  • स्वामी विवेकानंद पढ़ाई में तो अव्वल रहते थे ही इसके अलावा वे शारीरिक व्यायाम, खेलों में भी हिस्सा लेते थे।
  • स्वामी विवेकानंद जी ने यूरोपीय इतिहास का अध्ययन जेनेरल असेम्ब्ली इंस्टीटूशन में किया था।
  • स्वामी विवेकानंद को बंगाली भाषा की भी अच्छी समझ थी उन्होनें स्पेंसर की किताब एजुकेशन का बंगाली में अनुवाद किया आपको बता दें कि वे  हर्बट स्पेंसर की किताब से काफी प्रभावित थे। जब वे पश्चिमी दर्शन शास्त्रियों का अभ्यास कर रहे थे तब उन्होंने संस्कृत ग्रंथो और बंगाली साहित्यों को भी पढ़ा।
  • स्वामी विवेकानंद के प्रतिभा के चर्चे उनके बचपन से ही थे। इनका लगाव बचपन से ही आध्यात्म की तरफ अधिक लगाव था।  उन्हें बचपन से ही अपने गुरुओं की प्रशंसा मिली है
  • उन्होंने कई गुरओं आधयात्मिक ज्ञान लिया लेकिन राम कृष्ण इनके मुख्य गुरु थे  इसलिए उन्हें श्रुतिधर भी कहा गया है।

स्वामी विवेकानंद जी की मृत्यु – Swami Vivekananda Death

4 जुलाई 1902 को महज 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई। वहीं उनके शिष्यों की माने तो उन्होनें महा-समाधि ली थी।कुछ लोग कहते है की उन्हें गंभीर  बीमारी थी तो कुछ कहते है उन जहर दे दिया गया था अब सत्य कया है वो तो ईश्वर ही जानते है  उन्होंने अपनी भविष्यवाणी को सही साबित किया की वे 40 साल से ज्यादा नहीं जियेंगे। वहीं इस महान पुरुषार्थ वाले महापुरूष का अंतिम संस्कार गंगा नदी के तट पर किया गया था।

स्वामी विवेकानंद के विचार – Swami Vivekananda Quotes

अत्यंत प्रभावशाली और बुद्दिजीवी स्वामी विवेकानंद के विचारों से हर कोई प्रभावित होता था क्योंकि स्वामी जी के विचारों में हमेशा से ही राष्ट्रीयता देश हित  शामिल रही है। उन्होनें हमेशा देशवासियों के विकास के लिए काम किया है और नवजवानो के लिए वे प्रेरणा स्रोत  है वहीं उनके कई अनमोल विचारों को मानकर कोई भी मनुष्य अपना जीवन संवार सकता है।
स्वामी विवेकानंद जी मानते थे कि हर शख्स को अपनी जिंदगी में एक विचार या फिर संकल्प निश्चत करना  चाहिए और अपनी पूरी जिंदगी उसी संकल्प के लिए न्यौछावर कर देना चाहिए , तभी आपको सफलता मिल सकेगी।
एक कहावत है-
 एक लक्ष्य एक तरफ सारी दुनिया एक तरफ,  जब तक न मिले लक्ष्य एक तरफ सारी दुनिया एक तरफ 
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे                                      ये विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से समर्पित 
https://drive.google.com/file/d/12QL_S3R0UZ28hsSwqscIYMbz_-D7grk_/view?usp=sharing

 आप कोई सुझाव या जानकारी हमें मेल कर सकते है
                                   
                                  धन्यवाद

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